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    प्रस्तावना

    भारत में कृषि की संगठनात्मक संरचना 1871 में लॉर्ड मेयो (भारत के गवर्नर जनरल) के कार्यकाल के दौरान राजस्व एवं कृषि के साथ वाणिज्य के साथ शुरू हुई थी। कृषि विभाग की स्थापना वर्ष 1875 में हुई तथा प्रारम्भ में विभाग का कार्य आंकड़ों का संकलन तथा आदर्श फॉर्मों की स्थापना तक सीमित था। वर्ष 1880 में यह विभाग भू-अभिलेख विभाग के साथ संबद्ध हो गया। भारत सरकार अधिनियम 1919 पारित होने के पश्चात् कृषि विभाग राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गया, जिसके फलस्वरूप 01 दिसम्बर 1919 को स्वतंत्र कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश अस्तित्व में आया तथा 01 मई 1920 को इसकी औपचारिक स्थापना हुई। राज्य के विशेष भौगोलिक स्वरूप के दृष्टिगत, राज्य को गति प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा पर्वतीय संवर्ग के अन्तर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि विभाग के कार्मिकों को भर्ती कर कार्य लिया जाता था। वर्ष 09 नवम्बर, 2000 को उत्तर प्रदेश से पृथक होने के उपरांत कृषि विभाग, उत्तरांचल का कई बार पुनर्गठन किया गया, तथा उत्तरांचल शासन, कृषि एवं कृषि विपणन अनुभाग के शासनादेश संख्या-956/कृषि-1(41)/2002/दिनांक-02 अगस्त 2003 के द्वारा विभाग में 2609 पद सृजित किये गये। तद्पश्चात् दिनांक- 01 जनवरी 2007 को उत्तरांचल के स्थान पर राज्य का नाम परिवर्तित कर उत्तराखण्ड किया गया। उत्ताराखण्ड शासन, कृषि एवं कृषि विपणन अनुभाग-1 के शासनादेश संख्या-481/दिनांक-28 मई 2010 के द्वारा कृषि विभाग, उत्तराखण्ड में सिंगल विण्डो सिस्टम लागू किया गया, तथा विभाग में कुल 2489 पद सृजित करने के साथ-साथ पदनाम परिवर्तन एवं कार्यदायित्व का निर्धारण भी किया गया। तब से विभाग राज्य में बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में जुटा हुआ है।