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    विजन और मिशन

    विजन

    उत्पादक क्षेत्रों की सतत् उत्पादकता बनाये रखते हुये कम उत्पादक क्षेत्रों की उत्पादकता में वृद्धि के प्रयार करना। उन्नत प्रजाति के बीजों, उन्नत यंत्रों, कृषि निवेशों एवं उत्पादक स्रोतों की उचित व्यवस्था करना। दूरस्थ क्षेत्रों तक कृषि निवेशों की आपूर्ति एवं नवीनतम कृषि तकनीकियों का प्रचार-प्रसार। मृदा स्वास्थय प्रबन्धन, क्लस्टर आधारित कृषि के प्रोत्साहन तथा जैविक कृषि के क्षेत्रफल में वृद्धि करना। टिकाऊ कृषि प्रणालियां अपनाकर उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करने वाली लचीली कृषि क्रियाओं के पारस्परिक तन्त्र को बनाये रखना। नमी संरक्षण, भूमि एवं जल संरक्षण के उपाय करना। सूक्ष्म सिंचाई एवं अन्य जल बचत तकनीकों को अपनाकर सिंचन क्षमता में वृद्धि करना। कृषि विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन से रोजगार के अवसर पैदा करना। जलवायु परिवर्तन एवं आपदाओं में अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने वाली कृषि पद्धतियां अपनाना। आपदाओं तथा अन्य कारणों से होने वाले नुकसान की समय से क्षति-पूर्ति कराना। विभिन्न केन्द्रपोषित एवं राज्य पोषित योजनाओं में आय परख कार्यक्रमों को सम्मिलित करते हुये, उत्पादन के लाभकारी विपणन से कृषकों की आय में वृद्धि के उपाय करना।

    मिशन

    • उन्नत बीजों तथा नवीनतम कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन में गुणात्मक वृद्धि करना।
    • न्याय-पंचायत स्तरीय कृषि निवेश केन्द्रों पर खरीफ, रबी एवं जायद की फसलों की बुवाई से पूर्व निवेशों की आवश्यक मात्रा में पूर्ति करना, ताकि कृषकों को उनके नजदीकी केन्द्रों पर गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश यथा-बीज, कीट-रोगनाशक औषधियां, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैव उर्वरक आदि समय से उपलब्ध हो सकें।
    • मृदा स्वास्थय कार्ड में दी गईं संस्तुति के अनुसार संतुलित पोषक तत्वो के प्रयोग को प्रोत्साहित करना।
    • प्रदर्शन, प्रशिक्षण, गोष्ठीयों एवं अध्ययन भ्रमण के माध्यम से कृषकोपयोगी कल्याणकारी योजनाओं, नवीनतम कृषि पद्धतियों एवं तकनीकों का कृषकों एवं कृषक प्रक्षेत्रों तक व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
    • लघु एवं सीमान्त जोतों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु कलस्टर आधारित कृषि को प्रोत्साहित करना।
    • कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन तथा केन्द्र एवं राज्य-पोषित योजनाओं में आयपरक कार्यक्रमों को सम्मिलित रखते हुये कृषकों की आय में वृद्धि करना।
    • जैविक कृषि के क्षेत्रफल में वृद्धि करना। परम्परागत कृषि विकास योजना के अन्तर्गत पौष्टिक अनाजों एवं प्रदेश की विशिष्ट फसलों का पी0जी0एस0 Participatory Guarantee System प्रमाणीकरण।
    • मिलेट फसलों को राज्य मिलेट मिशन कार्यक्रम के तहत प्रोत्साहित करना।
    • स्थानीय फसलों का संरक्षण, सत्यापित बीजों का वितरण तथा भौगोलिक पहचान प्रदान करना।
    • कृषि में उच्च तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु सूचना एवं संचार तंत्र का प्रयोग।
    • राज्य में कृषि फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता से संबंधित आंकड़ों का एकत्रीकरण, संकलन एवं प्रकाशन करना।
    • केन्द्र एवं राज्य पोषित योजनाओं का सही क्रियान्यवयन करते हुये धनराशि का समय से उपयोग सुनिश्चित करना। कृषि से जुड़े रेखीय विभागों, विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, शोध संस्थानों एवं अन्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करते हुये कृषि विकास को गति देना।
    • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना से अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को जोड़ना। किसान सम्मान निधि के समस्त लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना ताकि उन्हे खेती हेतु सुगमता से अनुदानित ब्याज पर ऋण प्राप्त हो सके।
    • लघु, सीमांत, महिला कृषक एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कम मूल्य पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने हेतु पर्वतीय क्षेत्रों में फार्म मशीनरी बैंक एवं मैदानी क्षेत्रों में कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना करना।
    • कृषकों को गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश-1957, कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं बीज अधिनियम-1966 के अंतर्गत समय-समय पर उर्वरकों, रसायनों एवं बीजों के नमूनों का प्रयोगशालाओं में प्रमाणिक परीक्षण कराना।