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    खाद्य एवं पोषण सुरक्षा- कृषोन्नति योजना

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    • दिनांक : 01/01/2015 -

    खाद्य सुरक्षा की मूल अवधारणा यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोगों को हर समय अपने सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए बुनियादी भोजन तक पहुंच मिले। बढ़ते शहरीकरण के कारण खाद्य संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। स्थिर खाद्यान्न उत्पादन तथा बढ़ती आबादी को देखते हुये, भारत सरकार ने वर्ष 2007 में चावल, गेहूं और दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना, ‘राष्ट्रीय विकास परिषद की कृषि उप-समिति की सिफारिश के आधार पर शुरू की गयी थी। उत्तराखण्ड राज्य में चयनित जनपदों में क्षेत्र विस्तार और सतत् रूप से उत्पादकता वृद्धि, मृदा उर्वरता पुर्नस्थापित करने तथा रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2012-13 से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तत्कालीन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना की शुरूआत हुई है। यह कार्यक्रम धान, गेहूं एवं पौष्टिक अनाज हेतु चयनित जनपदों तथा मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन हेतुु समस्त जनपदों में संचालित है।

    मिशन के उद्देश्य-

    • चिन्हित जनपदों में क्षेत्र विस्तार एवं उत्पादकता वृद्धि कार्यक्रमों को चलाकर चावल, गेहूं, मोट अनाज, पौष्टिक अनाज, दलहन, तिलहन एवं गन्ना की कुल उत्पादन में वृद्धि करना।
    • व्यक्तिगत रूप से कृषि प्रक्षेत्रों पर मृदा उर्वरता एवं उत्पादकता को पुर्नस्थापित करना।
    • कृषि एवं रोजगार सृजन के अवसर पैदा करना एवं कृषि प्रक्षेत्रों में आर्थिकी के स्तर में वृद्धि सुनिश्चित कराते हुये किसानों में विश्वास पैदा करना।

    योजनान्तर्गत निम्न कार्यक्रम संचालित किये जाते है-

    • क्लस्टर प्रदर्शन
    • बीज वितरण
    • बीज उत्पादन
    • प्रजनक बीजों का क्रय
    • पौध एवं मृदा प्रबन्धन
    • कृषि यंत्र वितरण
    • सिंचाई यंत्र वितरण
    • प्रशिक्षण कार्यक्रम

    लाभार्थी:

    समस्त कृषक जिनके पास कृषि योग्य भूमि है/

    लाभ:

    गाईडलाईन के अनुसार।

    आवेदन कैसे करें

    कृपया अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क करें।