जैविक एवं प्राकृतिक कृषि

जैविक खेती मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्णतः सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत तो कम होती ही है इसके साथ ही कृषकों की आय में वृद्धि होती है तथा अंतराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद अधिक खरे उतरते हैं। जिसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में कृषक भाई अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक समय में निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण एवं मानव स्वास्थय के लिए जैविक खेती की राह अत्यन्त लाभदायक है। मानव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए नितान्त आवश्यक है कि प्राकृतिक संसाधन प्रदूषित न हों, शुद्ध वातावरण रहे एवं पौष्टिक आहार मिलता रहे, इसके लिए हमें जैविक खेती की कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा जोकि हमारे नैसर्गिक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को प्रदूषित किये बगैर समस्त जनमानस को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकेगी तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सकेगी।
जैविक कृषि कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य-
- उत्तम गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में उत्पादन करना।
- प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग।
- पौधों एवं जन्तुओं का उपयोग कर जैविक चक्र को गति प्रदान करना।
- मृदा स्वास्थ्य एवं मृदा की दीर्घकालीन उर्वरता बनाये रखना।
- कृषि तकनीकों से होने वाले सभी प्रदूषणों से बचाव।
- कृषकों को सुरक्षित वातावरण के साथ-साथ अधिकतम उत्पादन प्राप्त कराना।
वर्ष 2009-10 से जैविक कृषि कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में निम्न केन्द्र पोषित योजनाओं के अन्तर्गत जैविक कृषि कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है-
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-रफ्तार
इस योजना के अन्तर्गत कृषि विभाग एवं उत्तराखण्ड जैविक उत्पाद परिषद द्वारा थर्ड पार्टी प्रमाणीकरण के अन्तर्गत जैविक प्रमाणीकरण किया जा रहा है। यह परियोजना वर्ष 2017-18 से प्रारम्भ की गई है। इसमें प्रत्येक विकासखण्ड में जैविक कार्यां के सम्पादन एवं प्रशिक्षण के लिए 01-01 मास्टर ट्रेनर द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। परियोजना में वर्मी कम्पोस्ट पिट/नाडेप पिट का निर्माण, प्रशिक्षण, एक्पोजर विजिट, जैविक उत्पादों का विपणन एवं प्रमाणीकरण आदि कार्य किये जा रहे है।
परम्परागत कृषि विकास योजना-पी0के0वी0वाई0
इस योजना के अन्तर्गत प्रथम एवं द्वितीय चरण में 3900 कलस्टरों में कार्यक्रम संचालित है, जिसमें क ृषि, उत्तराखण्ड जैविक उत्पाद परिषद्, उद्यान, सगन्ध पौध केन्द्र एवं रेशम विभाग द्वारा कार्य किया जा रहा है। परियोजना में क्लस्टर गठन, गोष्ठी, प्रशिक्षण, एक्पोजर विजिट, जैविक उत्पादों का विपणन एवं पी0जी0एस0 प्रमाणीकरण आदि कार्य किये जा रहे है।
स्वच्छता एक्शन प्लान ‘‘नमामि गंगे क्लीन अभियान’’
भारत सरकार द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य कलस्टर अप्रोच के आधार पर चयनित गंगा बेसिन पर बसे ग्राम पंचायतों में पी0जी0एस0 सर्टिफिकेशन के अन्तर्गत जैविक कृषि का प्रोत्साहित करना है। यह योजना 90 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 10 प्रतिशत राज्यांश पर वित्त पोषित है। योजनान्तर्गत जैविक खेती पर कृषक प्रशिक्षण एवं कृषकों को एक्सपोजर भ्रमण कार्यक्रम कराया जा रहा है तथा पी0जी0एस0 प्रमाणीकरण, जैव निवेशों के वितरण, जैविक उत्पादों का विपणन, ब्रांड ब्यूल्डिंग, मेले, प्रदर्शनी, प्रचार-प्रसार एवं स्थानीय मेलों तथा राष्ट्रीय मेलों में प्रतिभाग हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिग
प्राकृतिक खेती का उद्देश्य उत्पादन की लागत को लगभग शून्य तक लाना है। इस पद्धति में उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई जैसे महंगे इनपुट की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐेसे समय में जब रासायनिक-गहन खेती के परिणामस्वरूप मिट्टी और पर्यावरण का क्षरण हो रहा है, शून्य लागत वाली पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धति निश्चित रूप से एक अनुकरणीय पहल है।
प्रदेश में प्राकृतिक कृषि के प्रोत्साहन हेतु 39 नयें कलस्टरों में राज्य पोषित योजना मुख्यमंत्री कृषि विकास योजनान्तर्गत नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कोरिडोर योजना का क्रियान्वयन भारत सरकार द्वारा पूर्व में स्वीकृत प्राकृतिक कृषि मिशन की गाईडलाईन के अनुसार जनपद पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी एवं चमोली में किया जा रहा है।
लाभार्थी:
दिशानिर्देशों के अनुसार
लाभ:
दिशानिर्देशों के अनुसार
आवेदन कैसे करें
कृपया अपने नजदीकी कृषि कार्यालय पर जाएँ।